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हिंदी विभाग एक शैक्षिक विभाग है जो हिंदी भाषा, साहित्य, और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करता है। यह विभाग विद्यार्थियों को हिंदी भाषा में दक्षता और साहित्य के विभिन्न रूपों की गहरी समझ विकसित करने के अवसर प्रदान करता है। विभाग का उद्देश्य हिंदी के महत्व को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को यह सिखाना है कि कैसे वे इस भाषा के माध्यम से अपनी सोच, विचार, और भावनाओं को प्रभावी रूप से व्यक्त कर सकते हैं।

  • भाषाई दक्षता का विकास: छात्रों को हिंदी भाषा में प्रवीणता प्राप्त कराना, ताकि वे प्रभावी संवाद और लेखन में सक्षम हो सकें।
  • साहित्यिक समझ: हिंदी साहित्य के विभिन्न रूपों (कविता, कहानी, नाटक, निबंध) में गहरी समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  • संस्कृतिक जागरूकता: भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से छात्रों को परिचित कराना, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।
  • समाजसेवा की भावना: हिंदी भाषा और साहित्य के माध्यम से समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता का प्रचार-प्रसार करना।
  • वैश्विक दृष्टिकोण: हिंदी साहित्य के अध्ययन के द्वारा विद्यार्थियों में वैश्विक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान विकसित करना।
  • शोध और सृजनात्मकता: शोध कार्य और सृजनात्मक लेखन को बढ़ावा देना, ताकि छात्र नए दृष्टिकोण और विचारों के साथ समाज में योगदान कर सकें।
  • प्रवृत्तियों का पालन: हिंदी भाषा और साहित्य में नए रुझानों और आधुनिक तकनीकों का समावेश कर, छात्रों को उन्नत और समकालीन शिक्षा प्रदान करना।
  • मीडिया और फिल्म अध्ययन: हिंदी में मीडिया और फिल्म अध्ययन की शिक्षा देना, ताकि छात्र नए मीडिया प्लेटफार्म पर अपने विचार व्यक्त कर सकें।
  • संचार कौशल का विकास: : छात्रों के संचार कौशल में सुधार करना, जिससे वे हिंदी भाषा में अपनी विचारधारा और दृष्टिकोण प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर सकें।
  • समाज और शिक्षा में योगदान: : हिंदी भाषा को एक प्रभावशाली और सशक्त उपकरण के रूप में स्थापित करना, जो समाज और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सके।
  • हिंदी भाषा का संवर्धन: : हिंदी भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना, ताकि यह भाषा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
  • शैक्षिक उत्कृष्टता: : विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना, ताकि वे हिंदी साहित्य, भाषा और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति समर्पित और जानकार बन सकें।वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
  • साहित्यिक शोध को प्रोत्साहन: : हिंदी साहित्य के विविध पहलुओं पर शोध कार्य को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को शोध की दिशा में प्रेरित करना।
  • संस्कृति और समाज का सशक्तीकरण: : हिंदी भाषा के माध्यम से भारतीय संस्कृति और समाज की गहरी समझ विकसित करना, ताकि छात्र समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनें।
  • समाज में जागरूकता का प्रसार: : हिंदी साहित्य और भाषा का उपयोग समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक मुद्दों पर संवाद करने और सामाजिक बदलाव की दिशा में योगदान करने के लिए करना।
  • आधुनिक शिक्षा का समावेश: :हिंदी विभाग में नवीनतम शिक्षण विधियों और तकनीकी उपकरणों का समावेश करके शिक्षा के स्तर को उच्च बनाना।
  • भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान: :छात्रों में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान और समझ विकसित करना, ताकि वे एक समावेशी और खुले विचार वाले समाज का निर्माण कर सकें।
  • सृजनात्मकता और विचारशीलता को बढ़ावा देना: :छात्रों में सृजनात्मक लेखन, कविता, निबंध और आलोचना में विचारशीलता को बढ़ावा देना।
  • संचार कौशल का विकास: :छात्रों के संवाद कौशल को मजबूत करना, ताकि वे हिंदी में स्पष्ट और प्रभावी ढंग से विचार व्यक्त कर सकें।
  • आधुनिक मीडिया में योगदान: :हिंदी भाषा का उपयोग मीडिया, फिल्म और डिजिटल प्लेटफार्मों पर बढ़ावा देना, ताकि यह समकालीन दुनिया में अपनी उपस्थिति बनाए रखे।
Banaja Taldi
Banaja Taldi

Lecturer In Hindi

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HOD's Message

“तू पढ़ महाभारत न बन कुंती, न द्रौपदी।
पढ़ रामायण,न बन सीता. न कैकेयी।
पढ़ मनुस्मृति,उलट महाभारत, पलट रामायण।
पढ़ कानून, मिटा तिमिर,लगा हलकार।
पढ़समाजशास्त्र, बन जावित्री,फहरा शिक्षा का परचम।” – रजनी तिलक

प्रस्तुत कविता के ज़रिए बच्चों को संदेश देना चाहती हूँ कि शिक्षा का परचम फैलाएँ, जड़ता से बाहर निकल, अपने सपनों को उड़ान दें।

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